सतत विकास और समावेशी विकास क्या है? विस्तार से जानकारी दीजिए!
विकास
विकास का समान अर्थ सकारात्मक परिवर्तन है यह परिवर्तन महोदय आर्थिक सामाजिक या नैतिक किसी भी प्रकार का हो सकता है इससे हमारे जीवन स्तर में समृद्धि आती है दूसरे शब्दों में निरंजन निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर होना ही विकास है लोगों के जीवन यापन के उच्चतम स्तर को प्राप्त करना ही विकास है
सतत विकास
पहली बार यह शब्द ब्रॉडबैंड आयोग ने सतत विकास को ऐसा विकास बताया जो भविष्य को की पीढ़ियों की आवश्यकता की पूर्ति में समझौता किए बिना वर्तमान की आवश्यकता पूरी करता है
#1992 में ब्राजील की राजधानी रियो डी जेनेरियो में संयुक्त राष्ट्र पृथ्वी शिखर सम्मेलन में पहली बार सतत विकास की अवधारणा को स्वीकार गया जाता है
# सतत विकास का उद्देश वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना है
# विकास से तात्पर्य संसाधनों को इस प्रकार मितव्ययी एवं तार्किक तरीके से दोहन करना है ताकि यह संसाधन भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहें
# इस प्रकार सतत विकास विकास की प्रक्रिया में पर्यावरणीय पहल भी शामिल करता है अर्थात विकास की प्रक्रिया इस प्रकार होनी चाहिए जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव ना पड़े
यह प्रदूषण, गरीबी, गरीब आवास और बेरोजगारी को कम करके प्राप्त किया जा सकता है। इस उम्र में, या भविष्य में किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। मानव और पर्यावरणीय स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जलवायु परिवर्तन और खराब वायु गुणवत्ता जैसे वैश्विक पर्यावरणीय खतरों को कम किया जाना चाहिए। गैर-नवीकरणीय संसाधनों जैसे कि जीवाश्म ईंधन का उपयोग रातोंरात नहीं रोका जाना चाहिए, लेकिन उन्हें कुशलता से उपयोग किया जाना चाहिए और उन्हें बाहर चरण में मदद करने के लिए विकल्पों के विकास को प्रोत्साहित किया जाना
समावेशी विकास
समावेशी विकास शब्द पहली बार वर्ष 2000 में चर्चा में आया नानक काकवानी और अर्नेस्टो एम पनीरिया ने अपने एक लेख व्हाट इज प्रो- पूअर ग्रोथ मे पहली बार समावेशी विकास का उल्लेख किया हालांकि इस लेख में उन्होंने सिर्फ एक बार ही समावेशी शब्द का इस्तेमाल किया
मंथन करने पर स्पष्ट हुआ कि विकास का लाभ कुछ ही वर्ग तक पहुंच पाता है समाज के निम्न वर्ग तक विकास का लाभ नहीं पहुंच पाता
यह पाया गया कि विकास तभी संभव है जब समाज के शोषित वंचित तथा निम्न वर्गों तक भी विकास का लाभ पहुंच जाए तथा वह भी समाज की मुख्यधारा में शामिल हो
इसके बाद विश्व बैंक ने समावेशी विकास की अवधारणा को अपनाया समावेशी विकास का अर्थ है समाज के गरीब पिछड़े सूची तथा वंचित वर्गों का सशक्तिकरण कर उन्हें विकास की मुख्यधारा में लाना ताकि वह ना केवल अपने जीवन स्तर को ऊंचा कर सके बल्कि देश की विकास की प्रक्रिया में भी भागीदारी बने
भारत में 12वीं पंचवर्षीय योजना में समावेशी विकास पर बल दिया गया 12वीं पंचवर्षीय योजना का विषय भी तीव्र संतोषरीय और अधिक समावेशी विकास था
संयुक्त राष्ट्र के एजेंडा 2030, में कुल 17 लक्ष्यों का निर्धारण किया गया था जो इस प्रकार से हैं:
*गरीबी के सभी रूपों की पूरे विश्व से समाप्ति।
*भूख समाप्ति, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा।
*सभी उम्र के लोगों में स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा।
*समावेशी और न्यायसंगत गुणवत्ता युक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही सभी को सीखने का अवसर देना।
*लैंगिक समानता प्राप्त करने के साथ ही महिलाओं और लड़कियों को सशक्त करना।
*सभी के लिये स्वच्छता और पानी के सतत प्रबंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
*सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच सुनिश्चित करना।
*सभी के लिये निरंतर समावेशी और सतत आर्थिक विकास, पूर्ण और उत्पादक रोज़गार, और सभ्य काम को बढ़ावा देना। *लचीली बुनियादी ढांचे, समावेशी और सतत औद्योगीकरण को बढ़ावा।
*देशों के बीच और भीतर असमानता को कम करना।
*सुरक्षित, लचीला और टिकाऊ शहर और मानव बस्तियों का निर्माण।
*स्थायी खपत और उत्पादन पैटर्न को सुनिश्चित करना।
*जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों से निपटने के लिये तत्काल कार्रवाई करना।
*स्थायी सतत विकास के लिये महासागरों, समुद्र और समुद्री संसाधनों का संरक्षण और उपयोग।
*सतत उपयोग को बढ़ावा देने वाले स्थलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों, सुरक्षित जंगलों और जैव विविधता के बढ़ते नुकसान को रोकने का प्रयास करना।
*सतत विकास के लिये शांतिपूर्ण और समावेशी समितियों को बढ़ावा देने के साथ ही सभी स्तरों पर इन्हें प्रभावी, जवाबदेही बनाना ताकि सभी के लिये न्याय सुनिश्चित हो सके।
*सतत विकास के लिये वैश्विक भागीदारी को पुनर्जीवित करने के अतिरिक्ति कार्यान्वयन के साधनों को मज़बूत बनाना।
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