3D प्रिंटिंग क्या है तथा इसके क्या उपयोग है?
3D प्रिंटिंग
3D प्रिंटिंग विनिर्माण की एक तकनीक है, जिसके अंतर्गत प्लास्टिक, राल, थर्माप्लास्टिक, धातु, फाइबर या चीनी मिट्टी आदि के माध्यम से किसी वस्तु का प्रोटोटाइप अथवा वर्किंग मॉडल बनाने के लिये कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइनिंग (CAD) का उपयोग किया जाता है।
कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइनिंग का आशय किसी डिज़ाइन के निर्माण, संशोधन, विश्लेषण और अनुकूलन आदि के लिये कंप्यूटर का उपयोग करने से है।
इस तकनीक के अंतर्गत प्रिंट किये जाने वाले मॉडल को पहले सॉफ्टवेयर की सहायता से कंप्यूटर पर डिज़ाइन किया जाता है, जिसके बाद उस डिज़ाइन के आधार पर 3D प्रिंटर को निर्देश दिये जाते हैं।
इस तकनीक में इस्तेमाल होने वाले प्रिंटर योगात्मक विनिर्माण तकनीक (Additive Manufacturing) पर आधारित होते हैं और इसके अंतर्गत कंपनियाँ विशिष्ट मांग वाली परियोजनाओं के लिये विशिष्ट उत्पाद जैसे- हल्के उपकरण ही बनाती हैं।
उद्देश्य
3D प्रिंटिंग अथवा योगात्मक विनिर्माण तकनीक के डिज़ाइन, विकास और तैनाती के लिये अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में सहायता करना।
घरेलू कंपनियों की तकनीकी और आर्थिक बाधाओं को दूर करना ताकि वे 3D प्रिंटिंग के क्षेत्र में अग्रणी देशों जैसे- अमेरिका और चीन की कंपनियों के लिये सहायक सुविधाओं का विकास कर सकें।
प्रमुख क्षेत्र और अनुप्रयोग
ऑटो और मोटर स्पेयर पार्ट जैसे- इंजन, लक्जरी वाहनों के आंतरिक और बाहरी हिस्से, या लैंडिंग गियर, जटिल ब्रैकेट और टरबाइन ब्लेड आदि के व्यवसाय में 3D प्रिंटिंग काफी महत्त्वपूर्ण साबित हो सकती है।
उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, कपड़े, खिलौने और आभूषणों में भी इस तकनीक के कुछ अनुप्रयोग हो सकते हैं।
3D प्रिंटिंग से लाभ
कम लागत- 3D प्रिंटिंग के द्वारा पारंपरिक तरीकों की तुलना में कम लागत पर उत्पादों का निर्माण किया जा सकता है।
समय की बचत- 3D प्रिंटिंग के द्वारा कम समय में गुणवत्तापूर्ण कार्य किया जा सकता है। यह कार्य की दक्षता में वृद्धि करने में सक्षम है।
अति कुशल- 3D प्रिंटिंग के द्वारा उत्पन्न प्रोटोटाइप का निर्माण बहुत आसानी और तीव्रता के साथ किया जा सकता है।
लचीलापन- 3D प्रिंटिंग के लिये विभिन्न प्रकार की सामग्रियाँ प्रयोग में लाई जा सकती हैं। इससे विभिन्न प्रकार के प्रोटोटाइप और उत्पादों को प्रिंट करना आसान हो जाता है।
टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता- उत्पाद नमी को अवशोषित नहीं करते हैं, जिससे वह लंबे समय तक प्रयोग में रहते हैं।
3D प्रिंटिंग से जुड़ी चुनौतियाँ
3D प्रिंटिंग से संबंधित चुनौतियों की बात की जाए तो 3D प्रिंटरों में विविधता के कारण उत्पादों के निर्माण में गुणवत्ता की भिन्नता आ जाएगी। साथ ही 3D प्रिंटरों में उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर एक आदर्श मानक का अभाव है।
इन प्रिंटरों के अंतर्गत उत्पादों के निर्माण में सर्वाधिक मात्र में प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है तथा इसमें बड़े स्तर पर बिजली की खपत होती है जिसे किसी भी दृष्टि से पर्यावरण के लिहाज़ से अच्छा नहीं कहा जा सकता है।
देश में न केवल लोगों में इस प्रौद्योगिकी के विषय में जागरूकता का अभाव है बल्कि इससे संबंधित शोध कार्यों का भी अभाव है। आयात लागत का अधिक होना, रोज़गार में कमी तथा 3D प्रिंटर से संबंधित घरेलू निर्माताओं की सीमित संख्या भी देश में 3D प्रिंटिंग की चुनौतियों को उजागर करती हैं।
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