4D प्रिंटिंग क्या है? What is 4D printing
4D प्रिंटिंग
4D प्रिंटिंग तकनीक के द्वारा ऐसी वस्तुओं को तैयार किया जा सकता है, जो ‘समय’ के साथ परिस्थितियों के अनुकूल अपना आकार बदल सकती हैं। ध्यातव्य है कि आस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग (University of Wollongong) के शोधकर्त्ताओं ने 3D प्रिंटेड पदार्थों का विकास किया, जिसे पानी या आग जैसे बाहरी प्रभावों के तहत नई संरचनाओं का रूप दिया जा सकता है। इस तकनीक को 4D प्रिंटिंग नाम दिया गया है। ये नए पदार्थ बच्चे के खिलौने की तरह खुद को एक से दूसरे आकार में बदलने में सक्षम है।
4D प्रिंटिंग तकनीक विकास के शुरुआती चरण में है, जो तेज़ी से बायोइंजीनियरिंग, मैटेरियल साइंस, रसायन विज्ञान और कंप्यूटर विज्ञान जैसे विषयों में एक नए प्रतिमान के रूप में उभर रही है।
नैनो प्रौद्योगिकी की दुनिया में यह अग्रिम पहल वृहद् स्तर पर अनुप्रयुक्त की जा रही है। 4D प्रिंटिंग तकनीक को ‘बायोप्रिंटिंग’, ‘एक्टिव ओरिगामी’ या ‘सेप मॉर्फिंग सिस्टम’ के नाम से भी जाना जाता है।
4D प्रिंटिंग 3D प्रिंटिंग से कैसे अलग हैं?
3डी प्रिंटिंग एक तेजी से प्रोटोटाइप और निर्माण तकनीक है जो त्रि-आयामी वस्तुओं को बनाने के लिए सामग्री परत दर परत जमा करती है।
मौलिक रूप से, 4D प्रिंटिंग भागों को बनाने के लिए 3D प्रिंटिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करती है। मुख्य अंतर यह है कि 4D प्रिंटेड ऑब्जेक्ट एक बार प्रिंट होने के बाद समय के साथ अपना आकार बदलते हैं, जबकि 3D प्रिंटेड ऑब्जेक्ट समान, निश्चित रूप बनाए रखता है।
4D प्रक्रिया के दौरान, एक ज्यामितीय कोड जोड़ा जाता है जिसमें "निर्देश" होते हैं कि एक उत्तेजना द्वारा ट्रिगर किए जाने पर एक आकृति कैसे चलती या बदलती है। यह प्रीप्रोग्रामिंग कदम स्मार्ट, उत्तरदायी वस्तुओं के निर्माण को सक्षम बनाता है जो विशिष्ट पर्यावरणीय कारकों के अनुकूल हो सकते हैं।
4D प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग
रोबोटिक्स के क्षेत्र में किसी जटिल विद्युत यांत्रिक उपकरण का इस्तेमाल किये बिना 4D प्रिंटिंग तकनीक का प्रयोग कर महत्त्वपूर्ण परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं।
इस तकनीक से चाइल्ड-केयर उत्पादों का निर्माण किया जा सकेगा जो तापमान और आर्द्रता पर प्रतिक्रिया कर सकें। जैसे- कपड़े और जूते पर्यावरण के अनुकूल अपना कार्य एवं रूप बदल लें।
मानव शरीर में प्रत्यारोपित किये जा सकने वाले जैव रासायनिक घटक शोधकर्त्ताओं द्वारा बनाए जा रहे हैं।
इस तकनीक का प्रयोग करके घरेलू उपकरण एवं उत्पादों को तापमान अनुकूल बनाकर ज़्यादा कार्य सक्षम एवं आरामदायक बनाया जा सकता है।
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