अर्थव्यवस्था के क्षेत्र
अर्थव्यवस्था के क्षेत्र
प्रत्येक अर्थव्यवस्था अपने आर्थिक गतिविधियों को आए अर्जुन के मामले में महत्त्व में कृत करना चाहती हैं ताकि आर्थिक गतिविधियों लाभकारी से और अधिक लाभकारी हो सके चाहे आर्थिक संगठन की व्यवस्था कुछ भी हो अर्थव्यवस्था के आर्थिक गतिविधियां को निम्नलिखित देने में बांटा गया है जिन्हें अर्थव्यवस्था के क्षेत्र कहा जाता है
प्राथमिक क्षेत्र -अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जहां पर आर्थिक संसाधनों को कथित तौर पर प्राप्त किया जाता है यथा उत्खनन, कृषि कार्य ,पशु पालन, मछली पालन इत्यादि !इसी चित्र क कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में कहा जाता है।
द्वितीय क्षेत्र- अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जो प्राथमिक क्षेत्र के उत्पादों को अपने गतिविधियों में कच्चे माल की तरह उपयोग करता है द्वितीय क्षेत्र कहलाता है उदाहरण के तौर पर लोहा एवं इस्पात, वस्त्र उद्योग, उद्योग ,वाहन ,बिस्किट केक इत्यादि उद्योग वास्तव में इस क्षेत्र में भी निर्माण कार्य होता है यही कारण है कि से औद्योगिक कहां जाता है ।
तृतीय क्षेत्र
तृतीय क्षेत्र अर्थव्यवस्था मे विभिन्न प्रकार की सेवाओं का उत्पादन किया जाता है यह बैंकिंग बीमा शिक्षा चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र को सेवा क्षेत्र के रूप में जाना जाता है
बाह्य क्षेत्र
1991 से पहले भारत सरकार ने विदेश व्यापार और विदेशी निवेशों पर प्रतिबंधों के माध्यम से वैश्विक प्रतियोगिता से अपने उद्योगों को संरक्षण देने की एक नीति अपनाई थी ।
उदारीकरण के प्रारंभ होने से भारत का बाहय क्षेत्र नाटकीय रूप से परिवर्तित हो गया । विदेश व्यापार उदार और टैरिफ एतर बनाया गया । विदेशी प्रत्यक्ष निवेश सहित विदेशी संस्थागत निवेश कई क्षेत्रों में हाथों - हाथ लिए जा रहे हैं । वित्तीय क्षेत्र जैसे बैंकिंग और बीमा का जोरदार उदय हो रहा है । रूपए मूल्य अन्य मुद्राओं के साथ-साथ जुड़कर बाजार की शक्तियों से बड़े रूप में जुड़ रहे हैं ।
अर्थव्यावस्था प्राथमिक क्षेत्र से तृतीय क्षेत्र की तरफ का क्रमिक विकास:
प्राचीन काल में होने वाली आर्थिक क्रियाएँ प्राइमरी सेक्टर में ही होती थीं। धीरे-धीरे समय बदला और भोजन का उत्पादन सरप्लस होने लगा। इसके परिणामस्वरूप अन्य उत्पादों की आवश्यकता बढ़ने लगी, जिससे सेकंडरी सेक्टर का विकास हुआ। उन्नीसवीं सदी में औद्योगिक क्रांति हुई जिसके परिणामस्वरूप सेकंडरी सेक्टर में तेजी से विकास हुआ।
जब सेकंडरी सेक्टर विकसित हो गया तो ऐसी गतिविधियों की जरूरत पड़ने लगी जिनसे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। ट्रांसपोर्ट सेक्टर इसका अच्छा उदाहरण है। उद्योग धंधों को सुचारु रूप से चलाने के लिए ट्रांसपोर्ट की जरूरत भी पड़ती है। औद्योगिक उत्पाद ग्राहकों तक पहुँचे इसके लिये दुकानों की जरूरत होती है। इसी तरह कई अन्य सेवाओं की जरूरत होती है, जैसे एकाउंटैंट, ट्यूटर, कोरियर, डॉक्टर, सॉफ्टवेयर, आदि। ये सभी सेवाएँ टरशियरी सेक्टर में आती हैं।में विभिन्न प्रकार की सेवाओं का उत्पादन किया जाता है यह बैंकिंग बीमा शिक्षा चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र को सेवा क्षेत्र के रूप में जाना जाता है
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