राजकोषीय नीति (Physical policy )और उनके उपकरण
राजकोषीय नीति
सरकार की आर्थिक नीति का एक प्रमुख घटक है इसके द्वारा आर्थिक विकास सामाजिक न्याय मूल्य स्थिरता पूर्ण रोजगार सृजन व संसाधनों की गतिशीलता जैसे लक्ष्य की पूर्ति की जाती है राजकोषीय नीति करवा कराधान सार्वजनिक वाहनों की सहायता से अपने लक्ष्यों की प्राप्ति करते हैं इसी नीति का निर्माण व क्रियान्वयन वित्त मंत्रालय द्वारा बजट के माध्यम से किया जाता है
वित्तमत्री 1 वर्ष में एक बार बजट के माध्यम से प्रस्तुत करता है आए भव्य नीति बजट के नीति कराधान नीति आदि नाम से है राज्य की राजकोषीय नीति राष्ट्र की विकास रणनीति के केंद्र में रहती है एक राष्ट्र के आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति में राजकोषीय नीति का प्रमुख योगदान होता है
राजकोषीय नीति के उद्देश्य
1-सरकार अपनी नीतियों के द्वारा प्राथमिक द्वितीयक तृतीयक क्षेत्र के बीच संतुलन को बनाने का प्रयास करते हुए अपने सभी संसाधनों में गतिशीलता लाने का प्रयास करती है
2-सामाजिक न्याय सरकार पर नीति को लागू करते हैं जिसके अनुसार उच्च वर्ग से अधिक करीब 1 वर्ष से अधिक अथवा कोई कर नहीं लिया जाता है जिससे समाज में सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके
3-मूल्य स्थिरता अर्थव्यवस्था में मूल स्थिरता बनाए रखना मौद्रिक नीति के अंतर्गत आता है परंतु मूल स्थिरता को बनाए रखना राजकोषीय नीति का भी उद्देश्य है इससे अर्थव्यवस्था में मुद्रा स्थिति को कम रखा जा सके
4-पूर्ण रोजगार सृजन अपने सभी नागरिकों को रोजगार उपलब्ध कराना व राष्ट्र की बेरोजगारी दर को कम से कम रखना सरकार का मुख्य उद्देश्य है इस उद्देश्य में सरकार अपनी राजकोषीय नीति बनाते समय रोजगार सर्जन को ध्यान में रखती है केवल मुनाफे को नहीं रहते मनरेगा महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005
भुगतान संतुलन व संतुलन विकास सरकार अपने राष्ट्र के आयात व निर्यातमें भुगतान संतुलन बनाए रखती है जिससे राष्ट्र का विकास संभव है
5-भुगतान संतुलन एवं संतुलित विकास–
इस नीति के द्वारा सरकार अपने राष्ट्र के आयात एवं निर्यात में भुगतान संतुलन को बनाये रखती है, जिससे कि राष्ट्र का संतुलित विकास संभव हो सके।
कराधान और कर
कर ही राष्ट्र की आय का मूल स्रोत है कर व कराधान नीति द्वारा सरकार एक राष्ट्र की आय को निर्धारित करती है करो को निर्धारित करके सामाजिक न्याय व संतुलन विकास जैसे उद्देश्य की पूर्ति की जाती है सार्वजनिक ऋण सरकार सदा ही मुनाफे में नहीं रहते है (जब व्यय कुल आय से अधिक होता है) ऐसे में घाटे का वित्त पषण करने के लिए सार्वजनिक ऋण लिया जाता है सरकार सार्वजनिक ऋण दो प्रकार से प्राप्त करती है आंतरिक जो कि राष्ट्र के लोगों से ही ब्रांड के माध्यम से लिया जाता है व बाहरी ऋण जो कि अन्य देश अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं से लिया जाता है
सार्वजनिक व्यय
सरकार सार्वजनिक की घोषणा करके आने वाले साल के लिए अपने खर्चों का एक विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करती है इससे यह पता चलता है की सरकार किस क्षेत्र में कितना व्यय कर रही है
निवेश व विनिवेश
नीति नए रोजगार सृजन अपनी आय को बढ़ाने के लिए सरकार अपनी राजकोषीय नीति में आने वाले वर्ष के लिए निवेश व विनिवेश को बताकर स्पष्ट करती है कि किस क्षेत्र में कितना निवेश व किस क्षेत्र में कितना विनिवेश किया जाएगा भारत के संदर्भ में राजकोषीय नीति अपने व्यापकता बा प्रभाव की शीतलता के कारण विकास रणनीति का केंद्र अवश्य है परंतु उसकी कुछ सीमाएं भी है राजकोषीय नीति की सीमाएं नीति की आवश्यकता अपने लागू हो उन्हें तथा उसके प्रभाव होने में काफी समय का लग जाना सरकार के लोक लुभावने कार्यक्रमों एवं योजनाओं के कारण व्यय में वृद्धि होती है जिससे राजकोषीय नीति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है राजकोषीय नीति से ना तो व्याजदर प्रभावित होती है और ना ही उपभोक्ता का व्यवहार अत राजकोषीय नीति बहुत सीमित है राजकोषीय नीति में अधिक विस्तार वादी रूप से सरकार निजी क्षेत्र को दुष्ट प्रभावित भी कर सकती है अतः राजकोषीय नीति का क्रियान्वयन प्रशासनिक तंत्र की कुशलता पर ही निर्भर करता है
राजकोषीय नीति को प्रभावित करने वाले कारक
*नीति की आवश्यकता के वक्त उसके लागू होने और प्रभावी होने में अधिक समय लग जाना।
*राजकोषीय नीति से न तो ब्याज दर प्रभावित होती है और न ही उपभोक्ता का व्यवहार, अतः राजकोषीय नीति बहुत सीमित है।
*सरकारों के लोक लुभावन कार्यक्रमों एवं योजनाओं के कारण व्यय में वृद्धि होती है जिससे राजकोषीय नीति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
*राजकोषीय नीति में अधिक विस्तारवादी रुख से सरकार निजी क्षेत्र को दुष्प्रभावित भी कर सकती
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