उपग्रह क्या है?(What is satellite)
उपग्रह क्या है?
योजनाओं के चारों ओर चक्कर लगाने वाले आकाशीय पिंडों को उपग्रह कहते हैं।
अलग-अलग योजनाएं अलग-अलग उपग्रह होते हैं।
उपग्रहों का स्वयं प्रकाश नहीं होता है। ये स्टारलाइट से प्रकाश प्राप्त करते हैं।
सौर मंडल में सभी योजनाओं के अलग-अलग उपग्रह होते हैं। जैसे शुक्र व बुध ग्रह के एक भी उपग्रह नहीं होता है। तथा पृथ्वी का एक उपग्रह का नाम चंद्रमा है। मंगल ग्रह के दो उपग्रहों का नाम डिमोश और फिमोश है। बृहस्पति ग्रह के सबसे अधिक उपग्रह 63 हैं। जहां पर शनि ग्रह के 33 उपग्रह हैं। व युरेनस ग्रह के 13 और नेप्चून ग्रह के 27 उपग्रह हैं।
उपग्रह की संरचना
:- हम जानेंगे कि उपग्रहों की संरचना समान होती है। किसी भी उपग्रह को प्रक्षेपित किया जाता है, बाद में उस उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में उसके चारों ओर चक्कर लगाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। तो उसके लिए सबसैटेलाइट के बाहर की तरफ से सोलर पैनल पैनल बन जाते हैं। उनकी सहायता से उपग्रहों में विद्युत संचार होता रहता है।
उपग्रहों के बीच में प्राप्तकर्ता होते हैं। जो पृथ्वी और अपने बीच में एक-समानता प्रदान करते हैं।
सैटेलाइट के अंदर कंट्रोल मोटर भी होती है जिसकी सहायता से उपग्रहों की सहायता से कंट्रोल किया जा सकता है। उनकी गति व दिशा में परिवर्तन किया जा सकता है।
जिस उपग्रह को जिस उद्देश्य से प्रक्षेपित किया जाता है, उस उद्देश्य के लिए आवश्यक वस्तु उस उपग्रह में मिल जाती है। उदाहरण के लिए अगर किसी उपग्रह को अंतरिक्ष की या योजनाओं की फोटोग्राफी के लिए भेजा जाता है तो उसका कैमरा अंदर रहता है।
उपग्रह के प्रकार
उपग्रह दो प्रकार के होते हैं कृत्रिम उपग्रह प्राकृतिक उपग्रह
प्राकृतिक उपग्रह (Natural Satellite) :- योजनाओं के चारों ओर अपनी कक्षा में परिक्रमा करने वाले प्राकृतिक आकाशीय पिंडों को प्राकृतिक उपग्रह कहते हैं।
इन उपग्रहों का निर्माण अंतरिक्ष में योजनाओं के विस्फोट से होता है।
उदाहरण :- चंद्रमा, पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है।
कृत्रिम उपग्रह (Artificial satellite) :- ये उपग्रह मानव द्वारा निर्मित होते हैं। यह उपग्रह पृथ्वी या अन्य योजनाओं के आस-पास अस्पष्ट उम्मीदवार हैं। इन उपग्रहों को विभिन्न उद्देश्यों के लिए योजनाओं की श्रेणी में स्थापित किया जाता है।
उदाहरण:- आर्यभट्ट आदि।
कई देशों एवं अंतरिक्ष द्वारा अंतरिक्ष में अनेक उपग्रहों के विभिन्न उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उपग्रहों को प्रक्षेपित किया जाता है।
भूस्थिर उपग्रह : – ऐसा उपग्रह जिसका आवर्तकाल पृथ्वी के आवर्तनकाल (24 घंटे) के बराबर होता है। यह उपग्रह पृथ्वी पर किसी प्रेक्षक को स्थिर दिखाई देता है। तो वह उपग्रह भूस्थिर उपग्रह है।
यह उपग्रह पृथ्वी के अल्ट्रा रेखीय तल में एक निश्चित ऊंचाई पर उसी में पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करते हैं जिस दिशा में पृथ्वी करती है। इसी कारण पृथ्वी और उनके आवर्तकाल समान रहते हैं।
उदाहरण :- इनसेट 3A उपग्रह इत्यादि।
भूस्थिर उपग्रह का उपयोग :- भूस्थिर उपग्रह का उपयोग है।
इनका उपयोग पृथ्वी की ओर अंतरिक्ष से आ रहे उल्कापिंड की जानकारी के लिए किया जाता है।
मौसम संबंधी जानकारी के लिए भूस्थिर उपग्रह का उपयोग किया जाता है।
भूस्थिर उपग्रह के लिए रेडियो और संचार संप्रेषण का उपयोग किया जाता है।
ध्रुवीय उपग्रह :- वे उपग्रह कक्षा की तल पृथ्वी के ध्रुव उत्तर व दक्षिण के निकट से पास होता है। ध्रुवीय उपग्रह कहलाते हैं।
इन उपग्रहों की गति पृथ्वी की घूर्णन गति के विपरीत होती है। तो जिस कक्षा में यह उपग्रह पृथ्वी की घूर्णन गति के विपरीत गति करते हैं उसे प्रश्च गति कक्षा कहते हैं।
ध्रुवीय उपग्रहों की पृथ्वी तल से लगभग 450 मील की ऊँचाई पर है।
किसी भी ध्रुव उपग्रह को पृथ्वी के एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक घूमने का समय लगभग 102 मिनट का होता है।
उदाहरण :- आईईआरएस उपग्रह, स्पॉट उपग्रह इत्यादि।
ध्रुवीय उपग्रहों का उपयोग :- इनका उपयोग निम्न प्रकार से किया जाता है।
ध्रुवीय उपग्रहों का उपयोग किसी देश द्वारा आपके पड़ोस या शत्रु देश पर जासूसी करने के लिए उपयोग में किया जाता है।
इनका उपयोग वातावरण तथा पर्यावरण के अध्ययन में किया जाता है।
ध्रुवीय उपग्रहों का उपयोग फोटोग्राफी और नेटवर्किंग में भी होता है।
भारतीय उपग्रह के नाम हिंदी में
अंतरिक्ष में भारत की उपलब्धियां :- आज के दिन अंतरिक्ष में भारत ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत के अंतरिक्ष में सन 1962 में यात्रा शुरू हुई।
भारत में अंतरिक्ष घटना के पैदा होने से डॉ विक्रम साराभाई माने जाते हैं।
उच्च स्तरीय अंतरिक्ष खोज कार्यों के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई। जिसका मुख्यालय बैंगलोर में है।
भारतीय अंतरिक्ष की यात्रा प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट (1975) से शुरू हुई।
आर्यभट्ट :- भारत ने अपना पहला उपग्रह आर्यभट्ट 19 अप्रैल 1975 में प्रक्षेपित किया। इसका निर्माण इसरो द्वारा किया गया था। जिसे सोवियत संघ द्वारा प्रक्षेपित किया गया था। इस उपग्रह का नाम भारत के महान संकेत आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया।
भास्कर :- सन 1979 में भास्कर-1 नामक उपग्रह का प्रक्षेपण हुआ। इसे भी रूस से प्रक्षेपित किया गया था।
रोहिणी :- इसके बाद भारत ने रोहिणी उपग्रह सूर्य 1980 में भारतीय अंतरिक्ष यान SLV-3 द्वारा श्री हरिकोटा से प्रक्षेपित किया। यह भारत द्वारा प्रथम प्रक्षेपण था। इसके बाद भारत ने कई उपग्रहों को प्रक्षेपित किया।
आज के दिन भारत अपने उपग्रहों के साथ अन्य देशों के उपग्रहों को भी प्रक्षेपित कर रहा है।
अचंभित :- भारत ने सन 1981 में अचंभित उपग्रह अमेरिका से प्रक्षेपित किया। संचार व्यवस्था के उद्देश्य के लिए इस उपग्रह को प्रक्षेपित किया गया था।
INSAT (भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह) :- सन 1982 में INSAT -1 और सन 1983 में INSAT - 1B और सन 1990 में INSAT - 1D व सन 1995 में INSAT -2C का जुड़ाव परीक्षण किया गया।
लेकिन सन 1997 में INSAT -2C प्रक्षेपण के समय खराब हो गया था।
GSLV:- सन 2001 में GSLV-D1 और सन 2004 में GSLV-EDUSAT का प्रक्षेपण हुआ।
तथा 5 जनवरी 2014 को जीएसएलवी-डी5 का दुबका हुआ और 18 दिसंबर 2014 को जीएसएलवी-एमके3 की प्रायोगिक उड़ान सफल रही।
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